सड़कों पर इधर-उधर बड़ी तादाद में नज़र आने वाली गायों के लिए मध्यप्रदेश में बुधवार को एक बड़े अभियान की शुरुआत की गई.
प्रदेश में 15 साल बाद कांग्रेस सत्ता में लौटी है और अब वह भी भाजपा की राह पर चलकर गायों को लेकर काफ़ी संवेदनशील नज़र आ रही है.
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पहले ही कहा था कि वह 'किसी भी सूरत में गौ माता को सड़कों पर नहीं देखना चाहते हैं.' यही वजह है कि अब सरकार के विभिन्न महकमों ने इसकी शुरुआत की है कि सड़कों पर गाय और अन्य मवेशी नज़र ना आएं.
मध्यप्रदेश के पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने नगर निगम को हिदायत दी थी कि इस अभियान के बाद अगर सड़कों पर गाय नज़र आती हैं तो निगम अमले के ख़िलाफ ही कार्रवाई की जाएगी.
लाखन सिंह यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक़ सड़कों पर अब मवेशी नज़र नहीं आने चाहिए, इसलिये यह अभियान छेड़ा गया है."
वहीं, राजधानी भोपाल में नगर निगम अमला मवेशियों को पकड़ने के लिए लग गया है.
भोपाल के महापौर अलोक शर्मा ने बताया, "हमनें आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए कारवाई शुरू कर दी है. इसके लिए कई टीमें बनाई गई हैं. साथ ही नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं. पशुओं को पकड़कर गोशाला ले जाया जाएगा."
उन्होंने बताया कि इसके लिए सरकार ने कुछ स्थान भी चिन्हित किए हैं ताकि वहां पर भी गायों को रखा जा सके.
हालांकि, इस मामले पर अब राजनीति भी प्रदेश में तेज़ हो गई है. भाजपा का कहना है कि उन्होंने गायों के लिए हर संभव काम किया. लेकिन गायों को आवारा कहने पर भी भाजपा को आपत्ति है.
प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय कहते हैं, "इसके लिए अगर सरकार कुछ करती है तो यह अच्छी बात है लेकिन सरकार को इस काम में दिखावा नहीं करना चाहिए. वहीं गायों को आवारा कहना भी ग़लत है."
कांग्रेस प्रवक्ता सरकार का बचाव करते हुए कहते हैं कि सरकार गायों को लेकर गंभीर है और गायों के संरक्षण के लिए सही काम करेगी जो अभी तक पिछली सरकार ने नहीं किया.
काग्रेंस प्रवक्ता भूपेंद्र सिंह कहते हैं, "हमारी सरकार गौ माता की रक्षा करेगी और उनका विस्थापन किया जाएगा. गांवों में सरकार ने गोशाला खोलने का फैसला किया है."
उन्होंने यह भी कहा कि गायों के सड़कों पर आने से जनहानि भी होती है और नुक़सान भी. इसलिए यह क़दम उठाया जाना ज़रूरी है.
लेकिन, भोपाल जैसे शहर में ही दावा किया जा रहा है कि पांच हज़ार से भी ज़्यादा मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं. लिहाज़ा इन्हें कांजी हाउस और गोशाला में पहुंचाना भी आसान काम नहीं है.
हालांकि, निगम दावा कर रहा है कि यह काम वह आसानी से कर लेगा. भोपाल नगर निगम कमिश्नर कहते हैं, "हमारे पास 1500 आवारा मवेशियों को रखने की जगह है. हमने जो सर्वे कराया है, उसके मुताबिक़ 3000 आवारा मवेशी हैं. लेकिन, हमें सही आंकड़ा आगे पता चलेगा. इनके लिए व्यवस्था की जा रही है."
लेकिन, प्रदेश के दूसरे स्थानों में हालत बहुत ही ज्यादा ख़राब है. प्रदेश के कई हाइवे ऐसे हैं जिन पर गायों का डेरा देखा जा सकता है. इसकी वजह से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं.
वहीं, गायों को लेकर सरकार के क़दम को विश्लेषक राजनीतिक नज़र से भी देख रहे है. चुनाव से पहले अपने वचन पत्र में कांग्रेस ने कई वादे गायों के लेकर किए थे. कांग्रेस के बारे में माना जा रहा था कि वह हिंदुओं से दूर होती जा रही है. इसी वजह से कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में ऐसे कई वादे किए थे ताकि हिंदुओं को क़रीब ला सके.
विश्लेषक मनोज कुमार कहते हैं, " गायों को लेकर यह एक बड़ी समस्या तो है. यह पूरे प्रदेश में देखी जा सकती है लेकिन यह क़दम इसलिए उठाया जा रहा है ताकि इसका फ़ायदा लोकसभा चुनाव में उठाया जा सके. इससे कांग्रेस को हिंदुओं को अपने क़रीब लाने का मौका मिलेगा."
Thursday, January 17, 2019
Wednesday, January 9, 2019
आख़िर कितने चरमपंथियों ने किया था पठानकोट पर हमला
आज से ठीक तीन साल पहले भारतीय वायुसेना के पठानकोट सैन्य बेस पर चरमपंथियों ने हमला बोला था.
जवाबी कार्रवाई में वायुसेना ने चरमपंथियों के मंसूबों को कुचलते हुए अपने अभियान को अंजाम दिया.
पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हुए इस हमले में कुल आठ लोगों की जानें गई थी.
उस जवाबी कार्रवाई में शामिल रहे एयर मार्शल एसबी देव हाल ही में वायुसेना के उप प्रमुख के पद से रिटायर हुए हैं.
सवालः पठानकोट चरमपंथी हमले को तीन साल पूरे होने वाले हैं, आप उस अभियान में शामिल रहे थे. आपको आज भी इस ऑपरेशन से जुड़ी कौन सी चीज़ याद है?
जवाबः हम जब किसी एयरफील्ड पर हमले की बात करते हैं तो इसके मायने ही बदल जाते हैं. पठानकोट वायुसेना अड्डा जम्मू-कश्मीर जैसे विवादित क्षेत्र में स्थित नहीं था. बल्कि पंजाब जैसे राज्य में स्थित है. और वायुसेना अड्डों की उस तरह सुरक्षा नहीं की जाती है जिस तरह देश की सीमाओं की सुरक्षा की जाती है.
इसकी वजह ये है कि वे हमारे ही देश में स्थित होते हैं. लेकिन वायुसेना के अड्डों को हवाई हमले की स्थिति से बचाने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए जाते हैं. ऐसे में वायुसेना अड्डा एक आसान शिकार है.
लेकिन मुझे ये अब तक समझ नहीं आया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर बचाव की मुद्रा में क्यों थी. इस अभियान को सही तरीक़े से अंजाम दिया गया था.
सवालः सरकार की किस प्रतिक्रिया से आपको लगा कि वे रक्षात्मक मुद्रा में हैं?
जवाबः मुझे ये सच में पता नहीं है. लेकिन उस दौरान मीडिया में एक मज़बूत अभियान चलाया गया जिसमें तीस साल पुरानी बातों की आलोचना की गई.
लोगों ने भारतीय वायुसेना के स्पेशल कमांडो फ़ोर्स 'गरुड़' के बारे में ग़लत बयानबाज़ी की. अगर इस सुरक्षाबल की क़ाबिलियत जाननी है तो भारतीय सेना से समझना चाहिए.
इस सुरक्षाबल ने अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र हासिल किया हैं. ऐसे में सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में होने की ज़रूरत नहीं थी.
चलिए, अब बात करते हैं कि लेफ़्टिनेंट कर्नल निरंजन की. उन्हें जिस तरह से प्रेस में कवरेज मिली. वो राजद्रोह था. मैं कल्पना नहीं कर सकता था. अफ़वाहें उड़ाई गईं कि वह सेल्फ़ी ले रहे थे. इसके बाद गरुड़ टीम बेहद आहत थी. वे मेरे पास आए और उन्होंने मुझे मीडिया में छप रही तमाम ख़बरें दिखाईं और बताया कि किस तरह की स्टोरीज़ को प्रेस में लीक किया जा रहा है.
जवाबः बिल्कुल, मेरे मुताबिक़ सरकार को बचाव करने की मुद्रा में नहीं होना चाहिए था. पठानकोट में चरमपंथी हमले के बाद मज़बूती से जवाबी कार्रवाई की गई.
लेकिन एक वायुसेना अड्डा ऐसी जगह होती है जहां पर कई जगहों को निशाना बनाया जा सकता है. ऐसी जगह पर ईंधन और हवाई जहाज़ जैसी तमाम चीज़ें होती हैं जिन पर हमला किया जा सकता है. लेकिन हम सब कुछ बचाने में कामयाब रहे.
जवाबी कार्रवाई में वायुसेना ने चरमपंथियों के मंसूबों को कुचलते हुए अपने अभियान को अंजाम दिया.
पठानकोट वायुसेना अड्डे पर हुए इस हमले में कुल आठ लोगों की जानें गई थी.
उस जवाबी कार्रवाई में शामिल रहे एयर मार्शल एसबी देव हाल ही में वायुसेना के उप प्रमुख के पद से रिटायर हुए हैं.
सवालः पठानकोट चरमपंथी हमले को तीन साल पूरे होने वाले हैं, आप उस अभियान में शामिल रहे थे. आपको आज भी इस ऑपरेशन से जुड़ी कौन सी चीज़ याद है?
जवाबः हम जब किसी एयरफील्ड पर हमले की बात करते हैं तो इसके मायने ही बदल जाते हैं. पठानकोट वायुसेना अड्डा जम्मू-कश्मीर जैसे विवादित क्षेत्र में स्थित नहीं था. बल्कि पंजाब जैसे राज्य में स्थित है. और वायुसेना अड्डों की उस तरह सुरक्षा नहीं की जाती है जिस तरह देश की सीमाओं की सुरक्षा की जाती है.
इसकी वजह ये है कि वे हमारे ही देश में स्थित होते हैं. लेकिन वायुसेना के अड्डों को हवाई हमले की स्थिति से बचाने के लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए जाते हैं. ऐसे में वायुसेना अड्डा एक आसान शिकार है.
लेकिन मुझे ये अब तक समझ नहीं आया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर बचाव की मुद्रा में क्यों थी. इस अभियान को सही तरीक़े से अंजाम दिया गया था.
सवालः सरकार की किस प्रतिक्रिया से आपको लगा कि वे रक्षात्मक मुद्रा में हैं?
जवाबः मुझे ये सच में पता नहीं है. लेकिन उस दौरान मीडिया में एक मज़बूत अभियान चलाया गया जिसमें तीस साल पुरानी बातों की आलोचना की गई.
लोगों ने भारतीय वायुसेना के स्पेशल कमांडो फ़ोर्स 'गरुड़' के बारे में ग़लत बयानबाज़ी की. अगर इस सुरक्षाबल की क़ाबिलियत जाननी है तो भारतीय सेना से समझना चाहिए.
इस सुरक्षाबल ने अशोक चक्र, कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र हासिल किया हैं. ऐसे में सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में होने की ज़रूरत नहीं थी.
चलिए, अब बात करते हैं कि लेफ़्टिनेंट कर्नल निरंजन की. उन्हें जिस तरह से प्रेस में कवरेज मिली. वो राजद्रोह था. मैं कल्पना नहीं कर सकता था. अफ़वाहें उड़ाई गईं कि वह सेल्फ़ी ले रहे थे. इसके बाद गरुड़ टीम बेहद आहत थी. वे मेरे पास आए और उन्होंने मुझे मीडिया में छप रही तमाम ख़बरें दिखाईं और बताया कि किस तरह की स्टोरीज़ को प्रेस में लीक किया जा रहा है.
जवाबः बिल्कुल, मेरे मुताबिक़ सरकार को बचाव करने की मुद्रा में नहीं होना चाहिए था. पठानकोट में चरमपंथी हमले के बाद मज़बूती से जवाबी कार्रवाई की गई.
लेकिन एक वायुसेना अड्डा ऐसी जगह होती है जहां पर कई जगहों को निशाना बनाया जा सकता है. ऐसी जगह पर ईंधन और हवाई जहाज़ जैसी तमाम चीज़ें होती हैं जिन पर हमला किया जा सकता है. लेकिन हम सब कुछ बचाने में कामयाब रहे.
Wednesday, January 2, 2019
नरेंद्र मोदी क्या गुरदासपुर से फूँकेंगे चुनावी बिगुल?
लोकसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन उससे पहले ही पंजाब का गुरदासपुर राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच चर्चा में है.
यहां से भारत-पाकिस्तान की सीमा करीब आधे घंटे की दूरी पर है और यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं.
ऐसा समझा जा रहा है कि वो आगामी चुनावों के मद्देनज़र यहीं से एनडीए के चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगे और ये उनका लॉन्च पैड होगा.
मुख्य शहर से करीब दो किलोमीटर दूर होने वाली इस रैली की तैयारियां जोरों पर हैं. जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए हैं. कई इसे मोदी की महा'रैली' बता रहे हैं तो कई धन्यवाद रैली कह रहे हैं.
अचानक एक रिक्शे से होने वाली घोषणा की ओर लोगों का ध्यान जाता हैः "आपके लिए बड़ी ख़बर है. पिछले 30 सालों में पहली बार कोई प्रधानमंत्री अपने शहर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को यहां आएंगे, आप उन्हें सुनने ज़रूर आएं."
ज़िले के लोग भी प्रधानमंत्री की रैली को लेकर उत्सुक दिख रहे हैं. कई अपनी मांगों की सूची लेकर तैयार हैं तो कई को उम्मीद है कि वो वहां की स्थानीय समस्याओं पर बात करेंगे.
यहाँ कई लोगों का मानना है कि उनका ज़िला पिछड़ा है और उसे विकास की सख्त ज़रूरत है.
जोगिंदर सिंह नाम के एक दुकानदार ने कहा, "गुरदारपुर ज़िला मुख्यालय भले ही है पर उसके पास के दूसरे शहर बटाला और पठानकोट ज़्यादा बेहतर हैं."
वो कहते हैं कि ज़िले में उद्योग धंधों की कमी है और युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री क्षेत्र की बेहतरी और विकास के लिए कुछ घोषणा करेंगे.
ज़िले के एक किसान गुरनाम सिंह का कहना है कि यहां की सरकारों ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए वो भुखमरी से लड़ने के लिए मजबूर हैं.
वो कहते हैं, "हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री किसानों के कर्ज़माफी की घोषणा करें ताकि पंजाब के किसान राहत की सांस ले सके."
गुरनाम सिंह ड्रग्स की समस्या का भी जिक्र करते हैं. वो कहते हैं कि यहां के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए उन्हें ड्रग्स की लत से दूर रखना मुश्किल है.
विशेषज्ञों का कहना है कि गुरदासपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत एनडीए गठबंधन के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय, दोनों नज़रिये से कई मायनों में महत्वपूर्ण है.
सिख समुदाय यह मानता है कि करतारपुर कॉरिडोर उनके लिए किसी बड़े गिफ्ट से कम नहीं है.
हाल ही में भारत और पाकिस्तान ने इस कॉरिडोर के निर्माण पर सहमति जताई थी और इसका निर्माण भी दोनों तरफ से शुरू हो चुका है.
भारत के लोग अब आसानी से पाकिस्तान के करतारपुर साहिब पहुंच सकेंगे. इस कॉरिडोर की मांग सिख कई दशकों से कर रहे थे. करतारपुर साहिब से समुदाय का भावनात्मक जुड़ाव है.
प्रधानमंत्री मोदी जहां रैली करने जा रहे हैं, वो इलाक़ा कॉरिडोर से महज आधे घंटे की दूरी पर है. ऐसे में नरेंद्र मोदी के लिए यह एक बेहतर मौका साबित हो सकता है कि वो इसका क्रेडिट ले सकें और यह बता सकें कि केंद्र सरकार का इसमें क्या योगदान रहा है.
यहां से भारत-पाकिस्तान की सीमा करीब आधे घंटे की दूरी पर है और यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं.
ऐसा समझा जा रहा है कि वो आगामी चुनावों के मद्देनज़र यहीं से एनडीए के चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगे और ये उनका लॉन्च पैड होगा.
मुख्य शहर से करीब दो किलोमीटर दूर होने वाली इस रैली की तैयारियां जोरों पर हैं. जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए हैं. कई इसे मोदी की महा'रैली' बता रहे हैं तो कई धन्यवाद रैली कह रहे हैं.
अचानक एक रिक्शे से होने वाली घोषणा की ओर लोगों का ध्यान जाता हैः "आपके लिए बड़ी ख़बर है. पिछले 30 सालों में पहली बार कोई प्रधानमंत्री अपने शहर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को यहां आएंगे, आप उन्हें सुनने ज़रूर आएं."
ज़िले के लोग भी प्रधानमंत्री की रैली को लेकर उत्सुक दिख रहे हैं. कई अपनी मांगों की सूची लेकर तैयार हैं तो कई को उम्मीद है कि वो वहां की स्थानीय समस्याओं पर बात करेंगे.
यहाँ कई लोगों का मानना है कि उनका ज़िला पिछड़ा है और उसे विकास की सख्त ज़रूरत है.
जोगिंदर सिंह नाम के एक दुकानदार ने कहा, "गुरदारपुर ज़िला मुख्यालय भले ही है पर उसके पास के दूसरे शहर बटाला और पठानकोट ज़्यादा बेहतर हैं."
वो कहते हैं कि ज़िले में उद्योग धंधों की कमी है और युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री क्षेत्र की बेहतरी और विकास के लिए कुछ घोषणा करेंगे.
ज़िले के एक किसान गुरनाम सिंह का कहना है कि यहां की सरकारों ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए वो भुखमरी से लड़ने के लिए मजबूर हैं.
वो कहते हैं, "हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री किसानों के कर्ज़माफी की घोषणा करें ताकि पंजाब के किसान राहत की सांस ले सके."
गुरनाम सिंह ड्रग्स की समस्या का भी जिक्र करते हैं. वो कहते हैं कि यहां के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए उन्हें ड्रग्स की लत से दूर रखना मुश्किल है.
विशेषज्ञों का कहना है कि गुरदासपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत एनडीए गठबंधन के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय, दोनों नज़रिये से कई मायनों में महत्वपूर्ण है.
सिख समुदाय यह मानता है कि करतारपुर कॉरिडोर उनके लिए किसी बड़े गिफ्ट से कम नहीं है.
हाल ही में भारत और पाकिस्तान ने इस कॉरिडोर के निर्माण पर सहमति जताई थी और इसका निर्माण भी दोनों तरफ से शुरू हो चुका है.
भारत के लोग अब आसानी से पाकिस्तान के करतारपुर साहिब पहुंच सकेंगे. इस कॉरिडोर की मांग सिख कई दशकों से कर रहे थे. करतारपुर साहिब से समुदाय का भावनात्मक जुड़ाव है.
प्रधानमंत्री मोदी जहां रैली करने जा रहे हैं, वो इलाक़ा कॉरिडोर से महज आधे घंटे की दूरी पर है. ऐसे में नरेंद्र मोदी के लिए यह एक बेहतर मौका साबित हो सकता है कि वो इसका क्रेडिट ले सकें और यह बता सकें कि केंद्र सरकार का इसमें क्या योगदान रहा है.
Friday, December 28, 2018
कमेंटेटर के तंज पर शास्त्री- जब तुम कैंटीन खोलोगे, तब मयंक देखेगा
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ डेब्यू टेस्ट में 76 रन की पारी खेलने वाले मयंक अग्रवाल का मजाक उड़ाने पर कोच रवि शास्त्री ने कमेंटेटर कैरी ओ कीफ को आड़े हाथ लिया है। शास्त्री ने कहा, जब आप (कैरी ओ कीफ) अपनी कैंटीन खोलेंगे तो वह (मयंक अग्रवाल) आकर कॉफी टेस्ट करेंगे और भारत लौटकर बताएंगे कि ऑस्ट्रेलिया की कॉफी अच्छी थी या नहीं।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और वर्तमान कमेंटेटर कैरी ओ कीफ ने रणजी मैच में मयंक अग्रवाल के तिहरे शतक पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, 'मयंक ने तिहरा शतक रेलवे कैंटीन के खिलाफ जड़ा था। उस मैच में कैंटीन के शेफ और वेटर गेंदबाजी कर रहे थे।'
कीफ ने जब ऑन एयर यह बात कही तब कॉमेंट्री बॉक्स में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर शेन वॉर्न और मार्क वॉ भी बैठे थे। मयंक अग्रवाल घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए खेलते हैं। उन्होंने पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र के खिलाफ तिहरा शतक जड़ा था।
डेब्यू टेस्ट में मयंक ने तोड़ा 71 साल पुराना रिकॉर्ड
मयंक ने कर्नाटक के लिए 46 फर्स्ट क्लास और 75 लिस्ट ए मैच खेले हैं, जिनमें 50 की औसत से रन बनाए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में खेले जा रहे बॉक्सिंग डे टेस्ट से डेब्यू किया। इस टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 76 रन बनाए।
वे ऑस्ट्रेलिया में डेब्यू टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। उन्होंने ऐसा कर दत्तू फड़कर का 71 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। दत्तू ने दिसंबर 1947 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर डेब्यू टेस्ट में 51 रन बनाए थे।
मयंक ने 2017-18 की विजय हजारे ट्रॉफी में 8 मैचों में 723 रन बनाकर सचिन तेंदुलकर का एक सीजन में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड तोड़ा था। उसी साल वे रणजी में भी सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे।
ओपनर इमाम उल हक (57) और शान मसूद (65) ने दूसरे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। एक समय टीम का स्कोर एक विकेट पर 101 रन था। अजहर अली (0) और असद शफीक (6) बड़ी पारी नहीं खेल पाए। बाबर आजम भी केवल छह रन बना पाए। पूरी टीम 56 ओवर में 190 रन पर सिमट गई। ओलिवर के अलावा रबाडा को तीन और स्टेन को दो विकेट मिले। पाक के ऑलआउट होते ही दूसरे दिन का खेल खत्म हो गया।
रोहित ने लगाई 10वीं फिफ्टी
रोहित शर्मा ने टेस्ट करियर का 10वां अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने टेस्ट में छह पारियों के बाद 50 से ज्यादा का स्कोर किया है। उन्होंने आखिरी बार पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए टेस्ट में 50 रनों की नाबाद पारी खेली थी। उन्होंने विदेश में भी छह पारियों के बाद 50 से ज्यादा रन बनाए। उन्होंने अगस्त 2016 में ग्रास आइलेट मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में 50 रन की पारी खेली थी। उसके बाद से उनकी विदेश में यह पहली अर्धशतकीय पारी है।
द्रविड़ से आगे निकले विराट
विराट कोहली एक कैलेंडर ईयर में विदेशी जमीन पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बने। वे 82 रन बनाकर आउट हुए। उनके इस साल अब तक 11 मैच में 1138 रन हो गए हैं। उन्होंने राहुल द्रविड़ का रिकॉर्ड तोड़ा। द्रविड़ ने 2002 में 1137 रन बनाए थे। हालांकि, वे ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय बनने से रह गए। उनके और सचिन तेंडुलकर दोनों ने ऑस्ट्रेलिया में अब तक 6-6 शतक लगाए हैं।
पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और वर्तमान कमेंटेटर कैरी ओ कीफ ने रणजी मैच में मयंक अग्रवाल के तिहरे शतक पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, 'मयंक ने तिहरा शतक रेलवे कैंटीन के खिलाफ जड़ा था। उस मैच में कैंटीन के शेफ और वेटर गेंदबाजी कर रहे थे।'
कीफ ने जब ऑन एयर यह बात कही तब कॉमेंट्री बॉक्स में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर शेन वॉर्न और मार्क वॉ भी बैठे थे। मयंक अग्रवाल घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक के लिए खेलते हैं। उन्होंने पिछले साल नवंबर में महाराष्ट्र के खिलाफ तिहरा शतक जड़ा था।
डेब्यू टेस्ट में मयंक ने तोड़ा 71 साल पुराना रिकॉर्ड
मयंक ने कर्नाटक के लिए 46 फर्स्ट क्लास और 75 लिस्ट ए मैच खेले हैं, जिनमें 50 की औसत से रन बनाए। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में खेले जा रहे बॉक्सिंग डे टेस्ट से डेब्यू किया। इस टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 76 रन बनाए।
वे ऑस्ट्रेलिया में डेब्यू टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी बने। उन्होंने ऐसा कर दत्तू फड़कर का 71 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। दत्तू ने दिसंबर 1947 में सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर डेब्यू टेस्ट में 51 रन बनाए थे।
मयंक ने 2017-18 की विजय हजारे ट्रॉफी में 8 मैचों में 723 रन बनाकर सचिन तेंदुलकर का एक सीजन में सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड तोड़ा था। उसी साल वे रणजी में भी सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे थे।
ओपनर इमाम उल हक (57) और शान मसूद (65) ने दूसरे विकेट के लिए 57 रन जोड़े। एक समय टीम का स्कोर एक विकेट पर 101 रन था। अजहर अली (0) और असद शफीक (6) बड़ी पारी नहीं खेल पाए। बाबर आजम भी केवल छह रन बना पाए। पूरी टीम 56 ओवर में 190 रन पर सिमट गई। ओलिवर के अलावा रबाडा को तीन और स्टेन को दो विकेट मिले। पाक के ऑलआउट होते ही दूसरे दिन का खेल खत्म हो गया।
रोहित ने लगाई 10वीं फिफ्टी
रोहित शर्मा ने टेस्ट करियर का 10वां अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने टेस्ट में छह पारियों के बाद 50 से ज्यादा का स्कोर किया है। उन्होंने आखिरी बार पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में श्रीलंका के खिलाफ खेले गए टेस्ट में 50 रनों की नाबाद पारी खेली थी। उन्होंने विदेश में भी छह पारियों के बाद 50 से ज्यादा रन बनाए। उन्होंने अगस्त 2016 में ग्रास आइलेट मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट में 50 रन की पारी खेली थी। उसके बाद से उनकी विदेश में यह पहली अर्धशतकीय पारी है।
द्रविड़ से आगे निकले विराट
विराट कोहली एक कैलेंडर ईयर में विदेशी जमीन पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बने। वे 82 रन बनाकर आउट हुए। उनके इस साल अब तक 11 मैच में 1138 रन हो गए हैं। उन्होंने राहुल द्रविड़ का रिकॉर्ड तोड़ा। द्रविड़ ने 2002 में 1137 रन बनाए थे। हालांकि, वे ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले भारतीय बनने से रह गए। उनके और सचिन तेंडुलकर दोनों ने ऑस्ट्रेलिया में अब तक 6-6 शतक लगाए हैं।
Wednesday, December 19, 2018
बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, निफ्टी 10,900 के पार
सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. शुरुआती कारोबर में सेंसेक्स में 200 अंकों तक की गिरावट दर्ज की गई लेकिन आखिरी घंटे में 77 अंक मजबूत होकर 36,347 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी भी बढ़त के साथ 10,909 के स्तर पर रहा. बता दें कि शुरुआती कारोबार में निफ्टी 56 अंक टूटकर 10,832 के स्तर पर आ गया था. आखिरी घंटे में खरीददारी बढ़ने से शेयर बाजार में यह तेजी आई है.
बैंक शेयरों के अलावा फार्मा और मेटल शेयरों में अच्छी खरीददारी रही. टॉप गेनर्स में सन फार्मा, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, वेदांता, एशियन पेंट, एलएंडटी, एसबीआईएन, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी और कोटक बैंक हैं. जबकि लूजर्स वाले प्रमुख शेयर हीरो मोटोकॉर्प, टीसीएस, ओएनजीसी और एचडीएफसी हैं.
रुपये में रिकवरी
इससे पहले मंगलवार के कारोबार में रुपये में रिकवरी दर्ज की गई. कारोबार के शुरू में रुपया 22 पैसे मजबूत होकर 71.33 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. वहीं सोमवार को रुपया 71.55 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था.
पिछले सप्ताह ऐसा रहा हाल
बता दें कि बीते सप्ताह आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 35 अंक बढ़त के साथ 35,963 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 10, 805 पर रहा. गुरुवार को सेंसेक्स में 150.57 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और 35,929.64 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 629 अंक बढ़कर 35779 के स्तर पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर रहा .
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
बैंक शेयरों के अलावा फार्मा और मेटल शेयरों में अच्छी खरीददारी रही. टॉप गेनर्स में सन फार्मा, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, वेदांता, एशियन पेंट, एलएंडटी, एसबीआईएन, आईसीआईसीआई बैंक, एनटीपीसी और कोटक बैंक हैं. जबकि लूजर्स वाले प्रमुख शेयर हीरो मोटोकॉर्प, टीसीएस, ओएनजीसी और एचडीएफसी हैं.
रुपये में रिकवरी
इससे पहले मंगलवार के कारोबार में रुपये में रिकवरी दर्ज की गई. कारोबार के शुरू में रुपया 22 पैसे मजबूत होकर 71.33 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला. वहीं सोमवार को रुपया 71.55 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ था.
पिछले सप्ताह ऐसा रहा हाल
बता दें कि बीते सप्ताह आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 35 अंक बढ़त के साथ 35,963 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 10, 805 पर रहा. गुरुवार को सेंसेक्स में 150.57 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और 35,929.64 के स्तर पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 53.95 अंकों की तेजी के साथ 10,791.55 पर बंद हुआ. बुधवार को सेंसेक्स 629 अंक बढ़कर 35779 के स्तर पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 190 अंकों की बढ़त के साथ 35,150 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि सोमवार को सेंसेक्स 713.53 अंक यानी 2 फीसदी टूटकर 34,959.72 के स्तर पर रहा .
सीपीएम सांसद ई करीम ने 500 रूपये और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस लेने, नष्ट करने और नये नोट जारी करने पर रिजर्व बैंक की ओर से खर्च की गयी धनराशि साथ ही नोटबंदी के दौरान बैंकों में नोट बदलने वालों की लाइन में लगे लोगों की मौत का ब्योरा मांगा था. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के बाद नये नोटों की छपाई पर हुआ व्यय अपनी लेखा रिपोर्ट में अलग से नहीं दर्शाया है.
सरकार की ओर से बताया गया कि नोटबंदी से पहले 2015-16 में नोटों की छपाई पर 34.21 अरब रुपये खर्च हुये थे जबकि 2016-17 में यह राशि 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये थी. उन्होंने नोटबंदी से उद्योग और रोजगार पर पड़े असर का कोई अध्ययन कराने के सवाल पर कहा कि सरकार ने इस संबंध में कोई विशिष्ट अध्ययन नहीं कराया है.
बता दें कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन देते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था. इसके बाद से 1000 और 500 के नोटों की वैधता खत्म हो गई थी. फैसले के बाद बैंकों में नए कैश की काफी किल्लत रही और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नोटबंदी के दौरान कैश के लिए लाइनों में लगने की वजह से हुए हादसों में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी.
Thursday, December 6, 2018
ट्रेन के थर्ड एसी कोच में महिलाओं को 6 अतिरिक्त रिजर्व सीटें मिलेंगी, उम्र की बाध्यता नहीं
महिलाओं के लिए ट्रेन के थर्ड एसी कोच में 6 सीटें रिजर्व रहेंगी। इसमें उम्र की कोई बाध्यता नहीं होगी। साथ ही यह भी नहीं देखा जाएगा कि महिला अकेली यात्रा कर रही है या फिर समूह में है।
यह रिजर्वेशन सीनियर सिटीजन और महिलाओं के लिए पहले से निर्धारित 4 लोअर बर्थ के कोटे के अतिरिक्त होगा। राजधानी, दुरंतो और दूसरी फुली एयर कंडीशंड ट्रेनों में नई व्यवस्था लागू होगी। रेलवे ने सर्कुलर जारी कर इसकी जानकारी दी।
थर्ड एसी में सीनियर सिटीजन, 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए 4 लोअर सीटों का संयुक्त कोटा पहले से लागू है। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के सभी स्लीपर कोच में महिलाओं के लिए 6 सीटों का आरक्षण भी पहले से लागू है। इसमें उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। इसके साथ ही गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनों में भी महिलाओं के लिए 6 बर्थ रिजर्व होती हैं।
विजय माल्या का कहना है कि 'प्रत्यपर्ण पर फैसले का मामला अलग है। इसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। लेकिन, जनता के पैसे का भुगतान अहम बात है और मैं 100% चुकाने के लिए तैयार हूं।'
माल्या ने कहा, 'नेता और मीडिया मेरे डिफॉल्टर होने और सरकारी बैंकों से लोन लेकर भागने की बात जोर-शोर से कह रहे हैं। यह गलत है। मेरे साथ सही बर्ताव क्यों नहीं होता? 2016 में जब मैंने कर्नाटक हाईकोर्ट में सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था तो इसका प्रचार क्यों नहीं किया गया?'
माल्या की दलील है कि हवाई ईंधन महंगा होने की वजह से किंगफिशर एयरलाइंस की हालत बिगड़ी। एयरलाइंस 140 डॉलर प्रति बैरल के सबसे ऊंचे क्रूड भाव के दौर से गुजरी थी। इस वजह से घाटा हुआ और बैंकों से लिए लोन की रकम खर्च हुई। मैंने पूरा मूलधन चुकाने का प्रस्ताव दिया था।
शराब कारोबारी का कहना है कि किंगफिशर तीन दशक तक भारत का सबसे बड़ा एल्कोहॉलिक ब्रेवरेज ग्रुप था। इस दौरान हमने सरकारी खजाने में हजारों करोड़ रुपए का योगदान दिया। किंगफिशर एयरलाइंस को खोने के बाद भी मैं बैंकों के नुकसान की भरपाई के लिए तैयार हूं।
यह रिजर्वेशन सीनियर सिटीजन और महिलाओं के लिए पहले से निर्धारित 4 लोअर बर्थ के कोटे के अतिरिक्त होगा। राजधानी, दुरंतो और दूसरी फुली एयर कंडीशंड ट्रेनों में नई व्यवस्था लागू होगी। रेलवे ने सर्कुलर जारी कर इसकी जानकारी दी।
थर्ड एसी में सीनियर सिटीजन, 45 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए 4 लोअर सीटों का संयुक्त कोटा पहले से लागू है। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के सभी स्लीपर कोच में महिलाओं के लिए 6 सीटों का आरक्षण भी पहले से लागू है। इसमें उम्र की कोई बाध्यता नहीं है। इसके साथ ही गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनों में भी महिलाओं के लिए 6 बर्थ रिजर्व होती हैं।
विजय माल्या का कहना है कि 'प्रत्यपर्ण पर फैसले का मामला अलग है। इसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी। लेकिन, जनता के पैसे का भुगतान अहम बात है और मैं 100% चुकाने के लिए तैयार हूं।'
माल्या ने कहा, 'नेता और मीडिया मेरे डिफॉल्टर होने और सरकारी बैंकों से लोन लेकर भागने की बात जोर-शोर से कह रहे हैं। यह गलत है। मेरे साथ सही बर्ताव क्यों नहीं होता? 2016 में जब मैंने कर्नाटक हाईकोर्ट में सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा था तो इसका प्रचार क्यों नहीं किया गया?'
माल्या की दलील है कि हवाई ईंधन महंगा होने की वजह से किंगफिशर एयरलाइंस की हालत बिगड़ी। एयरलाइंस 140 डॉलर प्रति बैरल के सबसे ऊंचे क्रूड भाव के दौर से गुजरी थी। इस वजह से घाटा हुआ और बैंकों से लिए लोन की रकम खर्च हुई। मैंने पूरा मूलधन चुकाने का प्रस्ताव दिया था।
शराब कारोबारी का कहना है कि किंगफिशर तीन दशक तक भारत का सबसे बड़ा एल्कोहॉलिक ब्रेवरेज ग्रुप था। इस दौरान हमने सरकारी खजाने में हजारों करोड़ रुपए का योगदान दिया। किंगफिशर एयरलाइंस को खोने के बाद भी मैं बैंकों के नुकसान की भरपाई के लिए तैयार हूं।
Monday, November 26, 2018
क्या है माओवादियों पर काबू पाने के लिए लॉन्च 'ऑपरेशन प्रहार-4'
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित सुकमा ज़िले में पुलिस ने एक विशेष अभियान में नौ संदिग्ध माओवादियों के मारे जाने का दावा किया है. मारे जाने वालों में से एक संदिग्ध माओवादी की पहचान ताती भीमा के रूप में की गई है.
पुलिस का कहना है कि ताती भीमा छत्तीसगढ़ में माओवादियों के प्रशिक्षकों के प्रमुख थे.
इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के दो जवान भी मारे गए हैं.
सुकमा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने बताया कि सोमवार की सुबह सुरक्षाबलों की टीम विशेष अभियान 'ऑपरेशन प्रहार-4' के लिए निकली हुई थी, जहां साकलेर के जंगलों में माओवादियों के साथ उनकी मुठभेड़ हुई.
छत्तीसगढ़ में नक्सल मामलों के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के अनुसार, "रविवार को सुकमा ज़िले के एसपी अभिषेक मीणा के नेतृत्व में ऑपरेशन प्रहार-4 लॉन्च किया गया था. इसमें एसटीएफ, सुकमा ज़िले की डीआरजी, सीआरपीएफ़ की कोबरा की टीम, तेलंगाना की स्पेशल टीम और ग्रे हाउंड के 150 जवानों समेत सुरक्षाबलों के लगभग 1200 लोगों ने ऑपरेशन प्रहार में हिस्सा लिया."
अवस्थी ने बताया कि इस विशेष अभियान को सीपीआई माओवादी के बटालियन नंबर-1 के क्षेत्र सालेतोंग, बड़े केडवाल और साकलेर के इलाक़े में चलाया गया था, जहां सुबह डीआरजी की टीम का सामना माओवादियों से हुआ.
हथियार फेंके जाने की सूचना
डीएम अवस्थी ने दावा किया कि मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से 8 संदिग्ध माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं. इसके अलावा एक अन्य स्थल से एक संदिग्ध माओवादी का शव बरामद किया गया.
पुलिस के अनुसार इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को एक तालाब में भारी मात्रा में हथियार फेंके जाने की ख़बर मिली थी. जिसके बाद दोपहर में इस तालाब में तलाशी अभियान शुरू किया गया लेकिन माओवादियों ने फिर से सुरक्षाबलों पर हमला बोला, जिसमें डीआरजी के दो जवान मारे गए. इसके बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी का काम बंद किया.
शाम पांच बजे के आसपास वायु सेना की मदद से सुरक्षाबलों को सुरक्षित स्थान पर लाने की कवायद शुरू की गई. वायु सेना के हेलिकॉप्टर से संदिग्ध माओवादियों के शव भी लाए गए हैं.
पुलिस का कहना है कि मारे गए संदिग्ध माओवादियों में से दो की पहचान कर ली गई है. इनमें से एक सुकमा ज़िले के ही पोलमपल्ली की महिला पोडियम राजे है, जबकि दूसरे संदिग्ध माओवादी के शव की पहचान ताती भीमा के रूप में की गई है.
माओवादी हिंसा के बढ़े मामले
इस साल माओवादी हिंसा की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
राज्य के 28 में से 14 ज़िले माओवादी हिंसा से गंभीर रूप से प्रभावित हैं.
इसी महीने छत्तीसगढ़ विधानसभा के माओवाद प्रभावित इलाकों में पहले चरण के मतदान के दिन 12 नवंबर को बीजापुर के पामेड़ में सुरक्षाबलों ने 5 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया था.
हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में इस महीने अब तक 20 माओवादियों समेत 29 लोग मारे गए हैं. इनमें 7 आम नागरिक और सुरक्षाबलों के दो जवान शामिल हैं.
इसी तरह पिछले महीने आठ माओवादियों समेत 21 लोग मारे गए थे. मारे जाने वालों में 3 आम नागरिक और सुरक्षाबलों के 10 जवान शामिल रहे.
पुलिस का कहना है कि ताती भीमा छत्तीसगढ़ में माओवादियों के प्रशिक्षकों के प्रमुख थे.
इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों के दो जवान भी मारे गए हैं.
सुकमा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा ने बताया कि सोमवार की सुबह सुरक्षाबलों की टीम विशेष अभियान 'ऑपरेशन प्रहार-4' के लिए निकली हुई थी, जहां साकलेर के जंगलों में माओवादियों के साथ उनकी मुठभेड़ हुई.
छत्तीसगढ़ में नक्सल मामलों के विशेष पुलिस महानिदेशक डीएम अवस्थी के अनुसार, "रविवार को सुकमा ज़िले के एसपी अभिषेक मीणा के नेतृत्व में ऑपरेशन प्रहार-4 लॉन्च किया गया था. इसमें एसटीएफ, सुकमा ज़िले की डीआरजी, सीआरपीएफ़ की कोबरा की टीम, तेलंगाना की स्पेशल टीम और ग्रे हाउंड के 150 जवानों समेत सुरक्षाबलों के लगभग 1200 लोगों ने ऑपरेशन प्रहार में हिस्सा लिया."
अवस्थी ने बताया कि इस विशेष अभियान को सीपीआई माओवादी के बटालियन नंबर-1 के क्षेत्र सालेतोंग, बड़े केडवाल और साकलेर के इलाक़े में चलाया गया था, जहां सुबह डीआरजी की टीम का सामना माओवादियों से हुआ.
हथियार फेंके जाने की सूचना
डीएम अवस्थी ने दावा किया कि मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से 8 संदिग्ध माओवादियों के शव बरामद किए गए हैं. इसके अलावा एक अन्य स्थल से एक संदिग्ध माओवादी का शव बरामद किया गया.
पुलिस के अनुसार इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षाबलों को एक तालाब में भारी मात्रा में हथियार फेंके जाने की ख़बर मिली थी. जिसके बाद दोपहर में इस तालाब में तलाशी अभियान शुरू किया गया लेकिन माओवादियों ने फिर से सुरक्षाबलों पर हमला बोला, जिसमें डीआरजी के दो जवान मारे गए. इसके बाद सुरक्षाबलों ने तलाशी का काम बंद किया.
शाम पांच बजे के आसपास वायु सेना की मदद से सुरक्षाबलों को सुरक्षित स्थान पर लाने की कवायद शुरू की गई. वायु सेना के हेलिकॉप्टर से संदिग्ध माओवादियों के शव भी लाए गए हैं.
पुलिस का कहना है कि मारे गए संदिग्ध माओवादियों में से दो की पहचान कर ली गई है. इनमें से एक सुकमा ज़िले के ही पोलमपल्ली की महिला पोडियम राजे है, जबकि दूसरे संदिग्ध माओवादी के शव की पहचान ताती भीमा के रूप में की गई है.
माओवादी हिंसा के बढ़े मामले
इस साल माओवादी हिंसा की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
राज्य के 28 में से 14 ज़िले माओवादी हिंसा से गंभीर रूप से प्रभावित हैं.
इसी महीने छत्तीसगढ़ विधानसभा के माओवाद प्रभावित इलाकों में पहले चरण के मतदान के दिन 12 नवंबर को बीजापुर के पामेड़ में सुरक्षाबलों ने 5 माओवादियों के मारे जाने का दावा किया था.
हिंसा की अलग-अलग घटनाओं में इस महीने अब तक 20 माओवादियों समेत 29 लोग मारे गए हैं. इनमें 7 आम नागरिक और सुरक्षाबलों के दो जवान शामिल हैं.
इसी तरह पिछले महीने आठ माओवादियों समेत 21 लोग मारे गए थे. मारे जाने वालों में 3 आम नागरिक और सुरक्षाबलों के 10 जवान शामिल रहे.
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