Wednesday, January 2, 2019

नरेंद्र मोदी क्या गुरदासपुर से फूँकेंगे चुनावी बिगुल?

लोकसभा चुनाव में कुछ महीने बाकी हैं, लेकिन उससे पहले ही पंजाब का गुरदासपुर राजनीतिक गहमा-गहमी के बीच चर्चा में है.

यहां से भारत-पाकिस्तान की सीमा करीब आधे घंटे की दूरी पर है और यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रैली करने जा रहे हैं.

ऐसा समझा जा रहा है कि वो आगामी चुनावों के मद्देनज़र यहीं से एनडीए के चुनावी अभियान का शंखनाद करेंगे और ये उनका लॉन्च पैड होगा.

मुख्य शहर से करीब दो किलोमीटर दूर होने वाली इस रैली की तैयारियां जोरों पर हैं. जगह-जगह होर्डिंग लगाए गए हैं. कई इसे मोदी की महा'रैली' बता रहे हैं तो कई धन्यवाद रैली कह रहे हैं.

अचानक एक रिक्शे से होने वाली घोषणा की ओर लोगों का ध्यान जाता हैः "आपके लिए बड़ी ख़बर है. पिछले 30 सालों में पहली बार कोई प्रधानमंत्री अपने शहर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को यहां आएंगे, आप उन्हें सुनने ज़रूर आएं."

ज़िले के लोग भी प्रधानमंत्री की रैली को लेकर उत्सुक दिख रहे हैं. कई अपनी मांगों की सूची लेकर तैयार हैं तो कई को उम्मीद है कि वो वहां की स्थानीय समस्याओं पर बात करेंगे.

यहाँ कई लोगों का मानना है कि उनका ज़िला पिछड़ा है और उसे विकास की सख्त ज़रूरत है.

जोगिंदर सिंह नाम के एक दुकानदार ने कहा, "गुरदारपुर ज़िला मुख्यालय भले ही है पर उसके पास के दूसरे शहर बटाला और पठानकोट ज़्यादा बेहतर हैं."

वो कहते हैं कि ज़िले में उद्योग धंधों की कमी है और युवाओं को बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री क्षेत्र की बेहतरी और विकास के लिए कुछ घोषणा करेंगे.

ज़िले के एक किसान गुरनाम सिंह का कहना है कि यहां की सरकारों ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए वो भुखमरी से लड़ने के लिए मजबूर हैं.

वो कहते हैं, "हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री किसानों के कर्ज़माफी की घोषणा करें ताकि पंजाब के किसान राहत की सांस ले सके."

गुरनाम सिंह ड्रग्स की समस्या का भी जिक्र करते हैं. वो कहते हैं कि यहां के युवाओं के पास रोजगार नहीं है, इसलिए उन्हें ड्रग्स की लत से दूर रखना मुश्किल है.

विशेषज्ञों का कहना है कि गुरदासपुर से चुनावी अभियान की शुरुआत एनडीए गठबंधन के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय, दोनों नज़रिये से कई मायनों में महत्वपूर्ण है.

सिख समुदाय यह मानता है कि करतारपुर कॉरिडोर उनके लिए किसी बड़े गिफ्ट से कम नहीं है.

हाल ही में भारत और पाकिस्तान ने इस कॉरिडोर के निर्माण पर सहमति जताई थी और इसका निर्माण भी दोनों तरफ से शुरू हो चुका है.

भारत के लोग अब आसानी से पाकिस्तान के करतारपुर साहिब पहुंच सकेंगे. इस कॉरिडोर की मांग सिख कई दशकों से कर रहे थे. करतारपुर साहिब से समुदाय का भावनात्मक जुड़ाव है.

प्रधानमंत्री मोदी जहां रैली करने जा रहे हैं, वो इलाक़ा कॉरिडोर से महज आधे घंटे की दूरी पर है. ऐसे में नरेंद्र मोदी के लिए यह एक बेहतर मौका साबित हो सकता है कि वो इसका क्रेडिट ले सकें और यह बता सकें कि केंद्र सरकार का इसमें क्या योगदान रहा है.

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